आपके हाथों में निवास स्थान अंगूठा छोटा और कम खुलने वाला हो, अंगुलियां टेढ़ी-मेढ़ी हों तो ऐसे व्यक्ति का निवास स्थान गंदी जगह पर होता है। जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनोें ही दोषपूर्ण हों अंगुलियां मोंटी हों और अंगूठा कम खुलता हो तो इनके घर के पास गंदगी होती है और पड़ोसी भी अच्छे नहीं होते है। हाथ पतला, काला, कठोर, ऊबड़- खाबड हो, अगूंठा छोटा और अंगुलियां मोटी हों तो ऐसे व्यक्तियों का निवास स्थान गंदी जगह पर होता है, रहने की जगह तंग-गली में होती है और पड़ौसी अच्छे नहीं होते। जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा दानोें ही मोटी हों तो निवास स्थान के पास जानवरों के बाडे ़ के कारण गंदगी हातेी है। यदि जीवन रेखा गोलाकार हो और उसमें त्रिभुज भी हो तथा मस्तिष्क रेखा शाखान्वित हो, हाथ कोमल हो तो मकान सुंदर व बड़े आकार का होता है। यदि साधारण मस्तिष्क रेखा मंगल या चंद्रमा पर जाती हो तो ये पैतृक घर में ही निवास करते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा शाखान्वित हो तो पहले पैतृक घर में, फिर दूसरे घर में निवास करते हैं। मस्तिष्क रेखा दोनों हाथों में द्विशाखाकार हो तो मकान या संपत्ति की संखया अधिक होती है। यदि मस्तिष्क रेखा अंत में द्विशाखाकार हो, सूर्य और बृहस्पति की अंगुलियां तिरछी हों तो मकान का दरवाजा आबादी की ओर होता है। यदि मस्तिष्क रखाो अतं में द्विशाखाकार हो और शनि की अंगुली लंबी हो तो मकान का दरवाजा कम आबादी की ओर होता है। हाथ कठोर और निम्न स्तर का हो, अंगूठा कम खुलता हो तथा मस्तिष्क रखाो दोषपूर्ण हो तो निवास स्थान छाटो तथा गंदी जगह पर होता है। मस्तिष्क रेखा या उसकी शाखा चंद्रमा पर जाती हो तो मकान किसी जलाशय (कुआं, बावडी, तालाब या नहर) के पास होता है। जीवन रेखा में त्रिकोण हो और एक से अधिक भाग्य रेखाएं हों तो ऐसे व्यक्ति खुले-स्थान में मकान, बंगला, फ्लैट आदि बनाते हैं। एक से अधिक भाग्य रेखाएं हों ,जीवन रेखा में त्रिकोण हो तथा शनि की अंगुली लंबी हो तो ऐसे व्यक्तियों के मकान में पार्क या बगीचा होता है। एक से अधिक भाग्य रेखाएँ हों जीवन रेखा में त्रिकोण हो तथा मुख्य भाग्य रेखा चंद्रमा के पर्वत से निकली हो तो मकान या बंगले में कोई जलाशय (स्वीमिगं पुल ) या नहाने का हौज हातो है। जिस आयु में भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा के किसी त्रिकोण से निकलती हो, उसी आयु में मकान या संपत्ति बनाते हैं या पुरानी संपत्ति में फेरबदल या विस्तार करते हैं। भाग्य रेखा वालों का मकान किसी पेड़ के नीचे या बड़े मकान की छाया में अथवा गली में होता है। जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा का जोड़ लंबा, जीवन रेखा टूटी हुई और मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो तो निवास स्थान के पास वातावरण गंदा होता है। यदि मस्तिष्क रेखा या उसकी शाखा चंद्रमा पर जाती हो, भाग्य रेखा भी चंद्रमा से निकलती हो तो निवास स्थान समुद्र, झील या नदी के किनारे हातो है। अंगुलियां छोटी पतली हो जीवन रेखा गोलाकार हो, मस्तिष्क रेखा अच्छी हो तो ऐसे व्यक्ति मकान बना लेते हैं। जीवन रेखा जिस आयु तक दाषेपूर्ण रहती है उस आयु तक व्यक्ति को रहने के मकान की कमी खटकती है। जीवन रेखा गोलाकार हो और मस्तिष्क रेखा शाखान्वित हो तो मकान स्वतंत्र खुली जगह में सुंदर और सुविधाओं से युक्त होता है। कुंडली से देखा जा सकता है जातक का मकान मकान किस दिशा में होगा कितना बड़ा होगा है मकान लोन चलेगा मकान बनेगा तो लोन कितने दिन में झुकेगा क्या उसको उसके परिवार वाले इस मकान लेने में मदद करेंगे क्या संपत्ति उसकी स्थाई रहेगी या फिर उसको बेचना पड़ेगा अगर कुंडली में चौथा भाव मजबूत है चौथा भाव की दशाएं चल रही है अगर कुंडली में तो निश्चित ही संपत्ति खरीदने का व बेचने का योग बनता है पहले भाव में चौथे भाव में सातवें भाव में दसवें भाव में मंगल बैठता है तो निश्चित ही उसके जीवन में मकान व अचल संपत्ति का सुख प्राप्त होता है अगर मंगल अपने नीच भाव कर्क राशि में बैठता है तो उसकी संपत्ति में कोई ना कोई विवाद हो जाना भाइयों का मतभेद हो जाना सरकारी या सरकार से उस भूमि पर कोई ना कोई परेशानी आ जाना भी देखा जाता है अगर मंगल पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि होगी तो भी संपत्ति रखना या संपत्ति में कोई ना कोई परेशानी हो जाती है अगर मंगल अच्छे भाव में है शुभ ग्रह की दृष्टि उस पर पड़ रही है तो आपका मकान बढ़ा होगा.
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