Sunday, 18 November 2018

पौधे आपको जीवन सुख में बना देंगे


आप मानो या न मनो लेकिन अधिकतर लोग तो मानते हैं कि धन देने वाले पेड़ और पौधे भी होते हैं। आओ जानते हैं 12 ऐसे पौधों के बारे में जिनमें से घर में दो या तीन पौधे लगाकर आप अपनी किस्मत बदल सकते हैं। पैधे किस तरह के होते हैं

मनी प्लांट -- बेल के घर में रहने से समृद्धि बढ़ती है। मनीप्लांट को आग्नेय दिशा में लगाना उचित माना गया है। इस दिशा के देवता गणेशजी हैं जबकि प्रतिनिधि शुक्र हैं।

क्रसुला ओवाटा ---इस पौधे को लगाने से यह धन को आकर्षित करता है। फेंगशुई अनुसार क्रासुला अच्छी-ऊर्जा की तरह धन को भी घर की ओर खींचता है। अंग्रेज़ी में इसे जेड प्लांट, फ्रेंडशिप ट्री, लकी प्लांट या मनी प्लांट कहते हैं।

लक्ष्मणा ---लक्ष्मणा का पौधा भी धनलक्ष्मी को आकर्षित करने में सक्षम है। घर में किसी भी बड़े गमले में इसे उगाया जा सकता है। कहते हैं कि जिस किसी के भी घर में सफेद पलाश और लक्षमणा का पौधा होता है वहां धनवर्षा होना शुरू हो जाती है।

केले का पेड़ ---समृद्धि के लिए केले के पेड़ की पूजा की जाती है। घर की चारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ है। बृहस्पति ग्रह का कारक होने के कारण इसे ईशान कोण में लगाना शुभ है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है।

नारियल का वृक्ष ---- नारियल का पेड़ सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है। यह मंगलकारी पेड़ घर के प्रांगण में हो तो धन और समृद्धि बनी रहती है। नारियल के पेड़ के होने से राहु या केतुजनित समस्या नहीं रहती।

तुलसी का पौधा ----तुलसी को माता लक्ष्मी का दूसरा रूप माना गया है। घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा या ईशान कोण में लगाएं। तुलसी सभी तरह के रोगाणु को घर में आने से पहले ही नष्ट कर देती है। यह घर में सुख, शांति और समृद्धि का विकास करती है। इसके नियमित सेवन से किसी भी प्रकार का गंभीर रोग नहीं होता है।

अश्वगंधा ---वास्तुशास्त्र के अनुसार अश्वगंधा का पेड़ लगाने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। अश्वगंधा का पेड़ अत्यन्त लोकप्रिय आयुर्वेदिक औषधि भी है जिसके कई तरह के लाभ हैं।

कनेर--- कनेर की तीन तरह की प्रजातियां होती है। एक सपेद कनेर, दूसरी लाल कनेर और तीसरी पीले कनेर। कनेर के पौधे को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। देवी लक्ष्मी को सफेद कनेर के फूल चढ़ाए जाते हैं। पीले रंग के फूल भगवान विष्णु को प्रिय होते हैं।

श्वेतार्क--- श्वेतार्क दूधवाला पौधा होता है, जो गणपति का प्रतीक है। वास्तु अनुसार दूध से युक्त पौधों का घर की सीमा में होना अशुभ होता है किंतु श्वेतार्क इसका अपवाद है, जिसे घर के समीप उगा सकते हैं। इससे घर में सुख, शांति और सदैव बरकत बनी रहती है।

श्वेत अपराजिता ----यह पौधा धनलक्ष्मी को आकर्षित करने में सक्षम है। संस्कृत में इसे आस्फोता, विष्णुकांता, विष्णुप्रिया, गिरीकर्णी, अश्वखुरा कहते हैं। श्वेत और नीले दोनों प्रकार की अपराजिता औषधीय गुणों से भरपुर है।

हरसिंगार ----पारिजात के फूलों को हरसिंगार और शैफालिका भी कहा जाता है। यह वृक्ष जिस भी घर-आंगन में होता है, वहां हमेशा शांति-समृद्धि बनी रहती है। इसके फूल तनाव हटाकर खुशियां ही खुशियां भरने की क्षमता रखते हैं।

रजनीगंधा ----रजनीगंधा की तीन किस्में होती है। इसका सुगंधित तेल और इत्र भी बनता है। इसके कई औषधीय गुण भी है।

जानिये मूलांक के बारे में ..


(1.) जिसका जन्म 1,10,19,28 को हुआ हो, उसका मूलांक एक होता है। गुस्सा जल्दी आता है।

(2.) जिसका जन्म 2,11,20, 29 को होता है, उसका मूलांक दो होता है। ये चंचल स्वभाव के होते हैं, स्थिर नहीं रहते । इनका मन एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता।

(3.) जिसका जन्म 3,12,21,30 को होता है, उसका मूलांक तीन होता है। ज्ञानी और स्पष्टवादी होते हैं। कला के प्रति रुझान होता है।

(4.) जिसका जन्म 4,13,22,31 को होता है, उसका मूलांक चार होता है। ये लोग मेहनती होते हैं। अनुशासनप्रिय होते हैं ,एक जगह शान्त नहीं बैठते।

(5.) जिसका जन्म 5,14,23 को होता है, उसका मूलांक पाँच होता है। मिल-जुलकर रहना पसन्द करते हैं।

(6.) जिसका जन्म 6,15,24 को होता है, उसका मूलांक छः होता है। इनकी सौन्दर्य के प्रति रुचि होती हैं।

(7.) जिसका जन्म 7,16,25 को होता है, उसका मूलांक सात होता है। धोखों का सामना करना पडता है। ये स्वभाव से मिलनसार ,अच्छे होते हैं।

(8.) जिसका जन्म 8,17,26 को होता है, उसका मूलांक आठ होता है। लोग रहस्मयवादी प्रवृत्ति।

(9.) जिसका जन्म 9,18,27 को होता है, उसका मूलांक नौ होता है। बहुत जल्दी उत्तेजित भी हो जाते हैं।

मूलांक से चुनिए करियर —-

मूलांक यानी आपकी डेट ऑफ बर्थ या जन्मदिन। यदि होरोस्कोप न हो तो केवल इसके द्वारा भी आप अपनी वर्किंग फील्ड के बारे में जान सकते है और मनचाही सफलता हासिल कर सकते हैं।

* यदि आप मूलांक 1 को रिप्रेजेंट करते है तो आपको डिजाइनर, टीम लीडर, फिल्म मेकिंग या नवीन इन्वेंशन के क्षेत्र में जाना चाहिए।

* यदि आपका मूलांक 2 है तो आपको किसी भी रचनात्मक काम को करना चाहिए जैसे डाँसिंग, राइटिंग, पोएट्री या रिसर्च के कार्य कर सकते हैं।

मूलांक 3 है तो आपके लिए एक्टिंग, टीचिंग, जर्नलिज्म, काउंसलिंग आदि बेहतर ऑप्शन है।

मूलांक 4 है तो आपको इंजीनियर, बिल्डर, प्रोग्रामर, मशीनों से रिलेटेड काम करना चाहिए।

मूलांक 5 है तो आपको प्रकाशन, विज्ञापन,लेखन आदि क्षेत्र में काम करना चाहिए।

मूलांक 6 को रिप्रेजेंट करते है तो आप सोशल वर्क, मेडिकल, आयुर्वेद,कुकिंग आदि फील्ड में काम कर सकते हैं।

मूलांक 7 है तो आपको वैज्ञानिक, दार्शनिक, जासूस, मिस्ट्री नॉवेल राइटर होना चाहिए।

मूलांक 8 है तो आपको बैंकिंग, मैनेजर, किसी संस्था का डायरेक्टर या मशीनों का काम करना चाहिए।

मूलांक 9 है तो आप खिलाड़ी, फिजिशियन, वकील,सैनिक आदि हो सकते हैं।

वास्तु दोष - घर में चित्र कैसे लगाए ?


घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है,
परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में लगाए गए
चित्र का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर
भी पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार,
हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई
जानी चाहिए।
घर के अन्दर और बाहर सुन्दर चित्र , पेंटिंग , बेल- बूटे ,
नक्काशी लगाने से ना सिर्फ सुन्दरता बढती है ,
वास्तु दोष भी दूर होते है।

1- फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन
शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों
पर लगाना शुभ होता है। इनसे जीवन में खुशहाली
आती है।

2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में
लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की
संभावना अधिक होती है।

3- यदि आप पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें
लगाना चाहते हैं तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में
लगाएं।

4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी
दिशा में लगाना शुभ होता है।

5- युद्ध प्रसंग, रामायण या महाभारत के युद्ध के चित्र,
क्रोध, वैराग्य, डरावना, वीभत्स, दुख की भावना
वाला, करुण रस से ओतप्रोत स्त्री, रोता बच्चा,
अकाल, सूखे पेड़ कोई भी चित्र घर में न लगायें।

6.घर का उत्तर पूर्व कोना (इशान कोण) स्वच्छ रखें व
वंहा बहते पानी का चित्र लगायें | (ध्यान रहे इस
चित्र में पहाड़/पर्वत न हो )

7. उत्तर क्षेत्र की दीवार पर हरियाली या हरे चहकते हुए
पक्षियों का शुभ चित्र लगाएं।
ऐसा करने से परिवार के लोगों की एकाग्रता बनेगी
साथ ही बुध ग्रह के शुभ परिणाम मिलेंगे। उत्तर दिशा
बुध की होती है।

8.लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी
चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना है।

9. घर में जुडवां बत्तख व हंस के चित्र लगाना लगाना
श्रेष्ठ रहता है। ऐसा करने से समृद्धि आती है।

10. घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मीजी की
तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं,
लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का
रंग क्रीम या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।

11.बच्चाा जिस तरफ मुंह करके पढता हो, उस दीवार पर
मां सरस्वती का चित्र लगाएं। पढाई में रूचि जागृत
होगी।

12 . अध्ययन कक्ष में मोर, वीणा, पुस्तक, कलम, हंस, मछली आदि के चित्र लगाने चाहिए।

13. बच्चों के शयन कक्ष में हरे फलदार वृक्षों के चित्र,
आकाश, बादल, चंद्रमा अदि तथा समुद्र तल की शुभ
आकृति वाले चित्र लगाने चाहिए।

14.फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति
का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाएं।

15.ऐसे नवदम्पत्ति जो संतान सुख पाना चाहते हैं वे
श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शाने वाली तस्वीर अपने
बेडरूम में लगाएं।

16.यदि आप अपने वैवाहिक रिश्ते को अधिक मजबुत और
प्रसन्नता से भरपूर बनाना चाहते हैं तो अपने बेडरुम में
नाचते हुए मोर का चित्र लगाएं।

17.यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या
देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में
निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं। इसके साथ ही बांसुरी, शंख, हिमालय आदि के चित्र दाम्पत्य सुख में वृद्धि के कारक होते हैं।

18.कैरियर में सफलता प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा में
जंपिंग फिश, डॉल्फिन या मछालियों के जोड़े का
प्रतीक चिन्ह लगाए जाने चाहिए। इससे न केवल बेहतर
कैरियर की ही प्राप्ति होती है बल्कि व्यक्ति की
बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।

19.अपने शयन कक्ष की पूर्वी दीवार पर उदय होते हुए सूर्य
की ओर पंक्तिबद्ध उड़ते हुए शुभ उर्जा वाले पक्षियों
के चित्र लगाएं। निराश, आलस से परिपूर्ण, अकर्मण्य,
आत्मविश्वास में कमी अनुभव करने वाले व्यक्तियों के
लिए यह विशेष प्रभावशाली है।

20.स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिण की दीवार पर
लगाने से सुख समृधि बढेगी

21.अग्नि कोण में रसोई घर नहीं हो, तो उस कोण में यज्ञ
करते हुए ऋषि-विप्रजन की चित्राकृति लगानी चाहिए।

22.रसोई घर में माँ अन्नपूर्णा का चित्र शुभ माना
जाता है।

23.मुख्य द्वार यदि वास्तु अनुरूप ना हो तो उस पर
नक्काशी , बेल बूटे बनवाएं।

24.दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए घर में राधा
कृष्ण की तस्वीर लगाएं।

25.पढने के कमरे में माँ सरस्वती , हंस , वीणा या
महापुरुषों की तस्वीर लगाएं।

26.व्यापर में सफलता पाने के लिए कारोबार स्थल पर
सफल और नामी व्यापारियों के चित्र लगाएं।

27.पूर्वजों की तस्वीर देवी देवताओं के साथ ना लगाएं।

28.दक्षिण मुखी भवन के द्वार पर नौ सोने या पीतल के
नवग्रह यंत्र लगाए और हल्दी से स्वस्तिक बनाए।

Beautiful Experience of Shri Hanuman!



एक बार हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया, यह देखकर मैं गदगद् हो गया !

ओह प्रभु! आपने कैसी शिक्षा दी, यदि मैं कूद पड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता तो क्या होता ?

बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मुझे भी लगता कि यदि मै न होता तो सीताजी को कौन बचाता ?

परन्तु आज आपने उन्हें बचाया ही नहीं बल्कि बचाने का काम रावण की पत्नी को ही सौंप दिया। तब मै समझ गया कि आप जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं, किसी का कोई महत्व नहीं है !

आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया हुआ है और वह लंका जलायेगा तो मै बड़ी चिंता मे पड़ गया कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नही है और त्रिजटा कह रही है तो मै क्या करुं ?

पर जब रावण के सैनिक तलवार लेकर मुझे मारने के लिये दौड़े तो मैंने अपने को बचाने की तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो मै समझ गया कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया !

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नही जायेगा पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर घी डालकर आग लगाई जाये तो मैं गदगद् हो गया कि उस लंका वाली संत त्रिजटा की ही बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता, पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया, जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !

इसलिये हमेशा याद रखें कि संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि........

'मैं न होता तो क्या होता? और यदि में नही रहूंगा तो क्या होगा?'

"मनुष्य व्यर्थ में ही स्वयं को कर्ता समझकर अपने अहंकार में डूबा रहता हैं।" इसीलिए कहा जाता है कि हमेशा नारी की इज्जत करें नारी का सम्मान करें माता बहन बुआ को सम्मान की नजरों से देखें ईश्वर उसे कहीं ना कहीं तरक्की देता है वह कैसे देता है कब देता है उसकी लीला अनमोल है लीलाधर इसी इसीलिए तो वे लीलाधर के नाम से भी जाना जाता है मोर मुकुट बंसी वाले तेरी सदा ही जय होै

।।जय श्री राम।।

कैसे पडता है ग्रहो का प्रभाव मानव जीवन पर... इसका लौजिक क्या है।

       प्रत्येक मानव के पास दिल दिमाग हाथ पैर और शरीर के अंग एक जैसे होते है , भगवान् ने सबका शरीर एक समान बनाया है पर सबकी सोच व कार्य...